उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का 'ऑपरेशन क्लीन' लगातार जारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बन चुके और रंगदारी, हत्या तथा पुलिस पर हमले जैसे संगीन अपराधों में वांछित 50 हजार रुपये के इनामी शूटर पवन बंसल उर्फ कल्लू का अंततः खात्मा हो गया है। शुक्रवार की रात आगरा में नोएडा STF और आगरा पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई एक खौफनाक मुठभेड़ में पवन बंसल मारा गया।READ ALSO:-मेरठ कैंट की नई तस्वीर: नमो भारत स्टेशन के पास बनेगा सुव्यवस्थित 'वेंडिंग ज़ोन', रेहड़ी-पटरी व्यापारियों को मिलेगा सम्मान और स्थान
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यह मुठभेड़ महज़ एक अपराधी के मारे जाने की घटना नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में फैले उस अंडरवर्ल्ड नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार है, जो जेल की सलाखों के पीछे से भी रंगदारी और हत्या का नेक्सस चला रहा था। 35 वर्षीय पवन बंसल कोई मामूली बदमाश नहीं था; वह कुख्यात रणदीप भाटी, अमित कसाना और हाल ही में हरियाणा के डॉन हिमांशु भाऊ के सिंडिकेट का एक अहम मोहरा बन चुका था। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, मुठभेड़ की रात की कहानी और एक साधारण गांव के लड़के के खूंखार अपराधी बनने के सफर को विस्तार से समझते हैं।
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 इसी जगह पर मुठभेड़ हुई है। मौके पर फोर्स मौजूद है।

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1. एनकाउंटर की वह खौफनाक रात: थाना एकता क्षेत्र में क्या हुआ?

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शुक्रवार की शाम पुलिस और STF के लिए बेहद अहम थी। नोएडा STF को अपने पुख्ता खुफिया सूत्रों से यह सटीक जानकारी मिली थी कि मोस्ट वांटेड क्रिमिनल पवन बंसल उर्फ कल्लू अपने एक साथी के साथ आगरा में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। इस सूचना के बाद STF के ASP राजकुमार मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और आगरा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर घेराबंदी की योजना बनाई गई।
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घेराबंदी और पहली चेतावनी रात के लगभग 8:30 बज रहे थे। आगरा का थाना एकता क्षेत्र, जो आमतौर पर शांत रहता है, वहां अचानक सरगर्मी बढ़ गई। STF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने रणनीतिक रूप से इलाके की नाकेबंदी कर दी थी। तभी पुलिस को संदिग्ध गतिविधि दिखी। पुलिस ने पवन और उसके साथी को घेर लिया। लाउडस्पीकर और आवाज देकर पुलिस ने उन्हें सरेंडर (आत्मसमर्पण) करने की स्पष्ट चेतावनी दी। लेकिन, बेखौफ और कानून की परवाह न करने वाले इस शूटर ने पुलिस की चेतावनी का जवाब गोलियों से दिया।
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20 राउंड फायर और 15 मिनट की दहशत खुद को चारों तरफ से घिरा देखकर पवन बंसल ने अपनी पिस्टल निकाली और पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस फायरिंग से इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस और बदमाश के बीच यह मुठभेड़ कोई छोटी झड़प नहीं थी, बल्कि यह करीब 15 से 20 मिनट तक चली एक भीषण गोलीबारी थी।
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आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बेखौफ बदमाश ने पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ 20 राउंड फायर किए। उसका इरादा साफ था—पुलिस टीम को नुकसान पहुंचाकर वहां से भाग निकलना।
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STF की जवाबी कार्रवाई और इंस्पेक्टर की बची जान अपराधी की इस आक्रामक फायरिंग के बीच STF की टीम ने अदम्य साहस और पेशेवर कौशल का परिचय दिया। STF के जवानों ने खुद को कवर करते हुए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान एक दिल दहला देने वाला पल तब आया जब बदमाश की बंदूक से निकली एक गोली सीधे STF के इंस्पेक्टर केशव को जा लगी। गनीमत यह रही कि इंस्पेक्टर केशव ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी हुई थी, जिसने उनकी जान बचा ली। वह इस हमले में बाल-बाल बचे।
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STF ने संयम बरतते हुए और सटीक निशाना लगाते हुए कुल 5 राउंड फायरिंग की। इन्हीं में से एक गोली पवन बंसल के सीने में जा लगी। गोली लगते ही वह बुरी तरह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। उसकी बंदूक शांत हो गई। इसी अफरा-तफरी और अंधेरे का फायदा उठाकर पवन का दूसरा साथी मौके से फरार होने में कामयाब रहा, जिसकी तलाश में अब सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
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अस्पताल में मौत और घायलों का इलाज मुठभेड़ शांत होते ही पुलिस टीम तत्काल घायल पवन बंसल के पास पहुंची। उसे बिना समय गंवाए गंभीर हालत में पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस भीषण गोलीबारी में यूपी पुलिस के दो बहादुर सिपाही भी घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फिलहाल दोनों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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2. कौन था पवन बंसल उर्फ कल्लू? (क्रिमिनल प्रोफाइल)

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पवन बंसल (उम्र 35 वर्ष) मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिरौली गांव का निवासी था। उसके पिता का नाम संतराम था। एक समय था जब पवन एक सामान्य युवक था, लेकिन पारिवारिक विवादों और पैसे की अंधी चाहत ने उसे जुर्म की उस अंधी गली में धकेल दिया, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं होता।
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लूट, हत्या और रंगदारी का पर्याय पवन के आपराधिक इतिहास पर नजर डालें तो वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उस पर छोटी-मोटी चोरियों के नहीं, बल्कि 18 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
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    हत्या (Murder): 4 मुकदमे
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    रंगदारी (Extortion): 2 मुकदमे
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    लूट और आर्म्स एक्ट: कई अन्य संगीन धाराएं।
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गाँव में खौफ का आलम पवन उर्फ कल्लू का अपने ही पैतृक गांव सिरौली और आसपास के इलाकों में इतना खौफ था कि उसके नाम से ही लोग कांपते थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब भी वह किसी काम से या छिपने के लिए अपने गांव आता था, तो पूरे गांव में सन्नाटा पसर जाता था। लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे और कोई भी उसके खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत नहीं करता था। उसका यह खौफ उसने अपनी क्रूरता से कमाया था।
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3. पुलिस से पिस्टल लूटना: पुलिस के इकबाल को चुनौती

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पवन बंसल की क्रिमिनल फाइल में सबसे दुस्साहसिक वारदातों में से एक थी पुलिसकर्मी पर हमला करके उसकी सरकारी पिस्टल लूटना। यह घटना बताती है कि उसके मन में कानून व्यवस्था और पुलिस का जरा भी खौफ नहीं था।
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STF नोएडा के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने इस संबंध में एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के बाद जब पवन बंसल के शव और घटनास्थल की तलाशी ली गई, तो उसके पास से भारी मात्रा में कारतूस और दो पिस्तौलें बरामद हुईं। इनमें से एक उच्च गुणवत्ता वाली 'मेड इन इटली' पिस्टल थी, और दूसरी एक 9MM की सरकारी पिस्टल थी।
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2016 की वह दुस्साहसिक वारदात यह बरामद हुई 9MM की पिस्टल कोई आम हथियार नहीं था। जांच में सामने आया कि यह वही पिस्टल है जिसे पवन ने साल 2016 में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) के बिसरख थाना क्षेत्र में लूटा था। उस समय कांस्टेबल मोनू धीमन एक ADJ (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज) की PSO (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) ड्यूटी में तैनात थे। पवन ने पुलिसकर्मी को निशाना बनाते हुए उसकी सर्विस रिवॉल्वर लूट ली थी। इस मामले में थाना बिसरख में बाकायदा मुकदमा भी दर्ज है। एक जज के सुरक्षाकर्मी से हथियार लूटना एक ऐसा कृत्य था जिसने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी थी। पवन पिछले 8 सालों से इस सरकारी हथियार का इस्तेमाल अपनी आपराधिक वारदातों में कर रहा था।
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4. जब अपने ही सगे चाचाओं के खून से रंगे हाथ (दिसंबर 2020 का डबल मर्डर)

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अपराध की दुनिया में पवन के गहरे उतरने के पीछे एक खूनी पारिवारिक रंजिश का इतिहास रहा है। यह कहानी जमीन के एक टुकड़े और खून के सफेद होने की है।
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पुलिस के डोजियर के अनुसार, पवन के पिता संतराम की मौत के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर गहरा विवाद पैदा हो गया। पवन का आरोप था कि उसके सगे चाचाओं—जैनेंद्र और सुरेंद्र—ने धोखे से उनकी पैतृक जमीन हड़प ली है। पवन ने कई बार अपनी जमीन वापस मांगी, लेकिन जब बात नहीं बनी, तो उसने पंचायत या अदालत का रास्ता चुनने के बजाय बंदूक का रास्ता चुना।
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दिसंबर 2020 का वह काला दिन बदले की आग में जल रहे पवन ने दिसंबर 2020 में एक खौफनाक योजना बनाई। उसने पूरी तरह से हथियारों से लैस होकर पहले गाजियाबाद के सिरौली गांव में अपने चाचा जैनेंद्र के घर में घुसकर उसे गोलियों से छलनी कर दिया। इसके बाद उसकी हत्या की प्यास नहीं बुझी और वह चिरोड़ी गांव पहुंचा, जहां उसने अपने दूसरे चाचा सुरेंद्र की भी दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी।
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इन दोहरे हत्याकांडों (Double Murder) ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हिला कर रख दिया था। सगे भतीजे द्वारा चाचाओं की इस निर्मम हत्या के बाद पवन पूरी तरह से पुलिस के रडार पर आ गया था और भूमिगत हो गया था। इसी हत्याकांड के बाद उसकी दहशत चरम पर पहुंच गई थी।
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हत्या के बाद 20 लाख की रंगदारी चाचाओं की हत्या के बाद पवन को लगा कि अब वह इस इलाके का बेताज बादशाह है। अपने इसी खौफ को भुनाने के लिए उसने हत्या के तुरंत बाद लोनी के सलाम होटल के संचालक को फोन किया और 20 लाख रुपये की रंगदारी (Protection Money) मांग ली। इस घटना ने साबित कर दिया था कि पवन अब किसी पारिवारिक विवाद का बदला लेने वाला नहीं, बल्कि एक पेशेवर और खूंखार गैंगस्टर बन चुका है।
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5. अंडरवर्ल्ड का नेक्सस: रणदीप भाटी, अमित कसाना से लेकर हिमांशु भाऊ तक

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कोई भी अपराधी बड़ा तब बनता है जब उसे किसी बड़े गैंग का संरक्षण मिलता है। पवन बंसल ने भी पश्चिमी यूपी के कुख्यात गैंग्स का दामन थाम लिया था।
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रणदीप भाटी और अमित कसाना गैंग का शार्प शूटर पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पवन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आतंक माने जाने वाले कुख्यात रणदीप भाटी और अमित कसाना गैंग का एक सक्रिय और भरोसेमंद शार्प शूटर था। इन गैंग्स का काम ठेकेदारों से रंगदारी वसूलना, विरोधी गैंग के सदस्यों की हत्या करना और जमीनों पर कब्जा करना रहा है। पवन इन गैंग्स के इशारे पर कई संगीन वारदातों को अंजाम दे चुका था।
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2021 में एक लाख का इनाम और गिरफ्तारी लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं और हत्या के एक हाई-प्रोफाइल मामले के बाद, साल 2021 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने पवन पर 1 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया था। पुलिस की कई टीमें उसके पीछे लगी थीं। आखिरकार, STF ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे दिल्ली से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की थी और उसे जेल भेज दिया गया था।
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जेल में बना नया और खतरनाक गठबंधन अक्सर जेलें अपराधियों के लिए सुधार गृह के बजाय नेटवर्किंग का अड्डा बन जाती हैं। पवन के साथ भी यही हुआ। जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात और सांठगांठ हरियाणा के कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ के गुर्गों से हुई। हिमांशु भाऊ गैंग, जो अपनी अत्याधुनिक कार्यप्रणाली और क्रूरता के लिए जाना जाता है, के संपर्क में आने से पवन की आपराधिक सोच का दायरा और बढ़ गया।
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2025 में जेल से बाहर आना और फिर से आतंक की शुरुआत हाल ही में (संभवतः 2025 की शुरुआत में), कानूनी खामियों या जमानत के जरिए पवन जेल से बाहर आ गया था। जेल से छूटते ही उसने शांत बैठने के बजाय फिर से अपना पुराना धंधा शुरू कर दिया। हिमांशु भाऊ और रणदीप भाटी गैंग के सपोर्ट के साथ उसने बड़े पैमाने पर दिल्ली और NCR के व्यापारियों से रंगदारी मांगना शुरू कर दिया था। पुलिस के पास लगातार शिकायतें आ रही थीं कि पवन बंसल के नाम से धमकी भरे फोन आ रहे हैं।
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6. आगरा में क्या थी साजिश? (एक बड़ी वारदात को टालना)

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आगरा में पवन बंसल की मौजूदगी कोई इत्तेफाक नहीं थी। पुलिस अधिकारियों और STF के शीर्ष अधिकारियों का स्पष्ट रूप से मानना है कि पवन किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने के लिए ही वहां पहुंचा था।
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उसके पास से बरामद हथियारों का जखीरा—जिसमें इटली की बनी विदेशी पिस्टल, लूटी गई 9MM पुलिस की पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस शामिल हैं—इस बात की गवाही देते हैं कि वह किसी की हत्या करने (कॉन्ट्रैक्ट किलिंग) या किसी बड़े व्यापारी का अपहरण/रंगदारी के इरादे से आगरा आया था। वह दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिर से गैंगवार भड़काने या बड़ी घटनाओं के जरिए अपना खौफ स्थापित करने की योजना बना रहा था। STF के इस सटीक और त्वरित ऑपरेशन ने एक बहुत बड़ी संभावित घटना को समय रहते टाल दिया है।
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7. पश्चिमी यूपी में अपराध पर नकेल: STF का संदेश

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पवन बंसल का एनकाउंटर उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के उस कड़े संदेश का हिस्सा है, जिसे "जीरो टॉलरेंस पॉलिसी" कहा जाता है।
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लंबे समय से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और आगरा जैसे जिले ऐसे ही गैंगस्टर्स की रणभूमि रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में STF ने रणदीप भाटी, सुंदर भाटी, अनिल दुजाना (जो पहले ही एनकाउंटर में मारा जा चुका है) और अमित कसाना जैसे गैंग्स की कमर तोड़ दी है। पवन बंसल का मारा जाना अमित कसाना और रणदीप भाटी गैंग के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। उनका एक बेहद शार्प और बेखौफ शूटर अब खत्म हो चुका है।
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यह कार्रवाई उन सभी अपराधियों के लिए एक खुला चेतावनी संदेश है जो जेल से बाहर आकर या फरार रहकर यह सोचते हैं कि वे कानून से बड़े हैं। STF की टीमें अब तकनीक, सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस के बेहतरीन समन्वय के साथ काम कर रही हैं, जिससे अपराधियों का बच निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है।
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पवन बंसल उर्फ कल्लू की कहानी अपराध की दुनिया की एक क्लासिक ट्रेजेडी है—एक इंसान जिसने पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए बंदूक उठाई, फिर उसी बंदूक के बल पर पुलिस को चुनौती दी, पुलिस की ही पिस्टल लूटी, खूंखार गैंग्स का मोहरा बना और अंततः उसी बंदूक की गोलियों की गूंज के बीच आगरा की सड़कों पर उसका अंत हो गया।
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नोएडा STF और आगरा पुलिस का यह जॉइंट ऑपरेशन पुलिस की सतर्कता और बहादुरी का एक बेहतरीन उदाहरण है। बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण बाल-बाल बचे इंस्पेक्टर केशव और घायल सिपाहियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़े खतरे को हमेशा के लिए शांत कर दिया है। अब पुलिस की टीमें मौके से फरार हुए पवन के दूसरे साथी की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं, ताकि इस गैंग के बचे-खुचे नेटवर्क को भी पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके।
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