मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में CJP Protest in Delhi का आज दूसरा दिन है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेताओं—अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका—को दिल्ली पुलिस ने रविवार सुबह करीब 10 बजे रिहा कर दिया। ये नेता लगभग 23 घंटे तक पुलिस की हिरासत में रहे। रिहाई के तुरंत बाद CJP नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
'फ्लाइट से उतरते ही किया गया किडनैप' प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। रांका ने आरोप लगाया कि शनिवार को फ्लाइट से दिल्ली पहुंचते ही उन्हें और उनके साथियों को पुलिस ने एक तरह से किडनैप कर लिया था। उन्होंने दावा किया कि सरकार चुनाव आयोग को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और इसी वजह से हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। CJP ने अपने आधिकारिक 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से रिहाई के बाद पोस्ट किया, "आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कॉकरोच कभी नहीं मरते।"
सौरव दास का दावा— 1975 जैसी इमरजेंसी के हालात CJP नेता सौरव दास ने मौजूदा स्थिति की तुलना 1975 के आपातकाल से की है। उन्होंने कहा कि देश में डर का माहौल बनाया जा रहा है और सरकार अपने ही लोगों से जंग लड़ रही है। दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली को एक छावनी में तब्दील कर दिया गया है और प्रदर्शनकारियों की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। सौरव दास ने दावा किया कि आरएसएस (RSS) भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के पक्ष में है, लेकिन सरकार उन्हें बचा रही है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री की जीत में ज्ञानेश कुमार की कोई भूमिका थी, जिसकी वजह से उन्हें पद से नहीं हटाया जा रहा है?
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दादी के निधन पर दीपके रवाना, पुलिस पर असंवेदनशीलता का आरोप हिरासत के दौरान CJP नेता अभिजीत दीपके की दादी का निधन हो गया। रिहाई के बाद दीपके वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल से मिलने उनके आवास पहुंचे और फिर महाराष्ट्र स्थित अपने घर के लिए रवाना हो गए। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन इतना असंवेदनशील था कि दादी की मौत की खबर देने के लिए भी वे कैमरे और माइक लेकर पहुंचे थे। दीपके द्वारा अपने परिजनों से बात करने की गुहार को भी पुलिस ने अनसुना कर दिया।
जंतर-मंतर और राजीव चौक पर प्रदर्शन जारी रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व CJP नेता अजिंक्य शिंदे कर रहे हैं। दूसरी तरफ, राजीव चौक और कनॉट प्लेस के इनर सर्कल से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में SFI के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी भी शामिल हैं। SFI कार्यकर्ताओं ने बस के अंदर से वीडियो जारी कर पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया है। इसके अलावा, CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।
सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी लड़ाई राजधानी में Jantar Mantar Protest को देखते हुए 38,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। शनिवार को करीब 7,000 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। इस मामले की गूंज अदालत तक भी पहुंच गई है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने पैरवी की।

Sabse pehle comment karne wale banein.