मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यह याचिका लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं ने दायर की है। इसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), वोटरों के नाम हटाने और फॉर्म-6 में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को अदालत की ओर निकाले गए विपक्षी मार्च को लेकर भी राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है।

SIR और फॉर्म-6 में बदलाव पर उठाए सवाल

विपक्षी नेताओं की याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम कथित तौर पर मनमाने ढंग से हटाए जाने और ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फॉर्म में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा से नए मतदाताओं के पंजीकरण में परेशानी हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और पात्र मतदाताओं के नाम बिना उचित नोटिस व सुनवाई के नहीं हटाने की मांग की है। ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं, जिन पर अदालत ने जवाब मांगा है।

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राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर भी सवाल

12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता भी शामिल हुए थे।

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15 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मार्च को लेकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया। अदालत ने न्यायपालिका पर दबाव डालने के प्रयासों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति या समूह न्यायपालिका को दबाव में नहीं ला सकता। इस नोटिस का संबंध मार्च से जुड़ी अलग कार्यवाही से है, जबकि चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका अलग मामला है।

इससे पहले 5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 में किए गए कथित संशोधनों को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत ने चुनाव आयोग से इस बदलाव से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा था। दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले कुछ मतदाताओं के सामने भी समस्या उठी थी। इस मुद्दे पर अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश देने की बात कही थी।

विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद चुनाव आयोग को याचिका में उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखना होगा।

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