मेरठ: किठौली में शराब की दुकान के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, बच्ची के एक्सीडेंट के बाद फूटा गुस्सा

 नियमों की अनदेखी का आरोप, ग्रामीणों ने दी दुकान तोड़ने की चेतावनी, पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक मदद की मांग।
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मेरठ जिले के जानी खुर्द क्षेत्र के किठौली गांव में शराब की दुकान खुलने के विरोध में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। ग्रामीणों का गुस्सा एक हालिया घटना के बाद भड़क उठा, जिसमें गांव की एक बच्ची शराब के ठेके की वजह से कथित तौर पर दुर्घटना का शिकार हो गई और उसे गंभीर चोटें आई हैं।READ ALSO:-बिजनौर: बाग में पड़ी सुलगती राख से मासूम बच्ची की मौत, बचाने में माता-पिता भी झुलसे

 

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने घायल बच्ची को अपने साथ लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर गांव में खोली गई शराब की दुकान को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की। उनका आरोप है कि शराब के ठेके के कारण गांव में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और इसी वजह से उनकी बच्ची भी हादसे का शिकार हुई।

 

ग्रामीणों ने आबकारी विभाग पर नियमों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नई शराब की दुकानों का आवंटन करते समय शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और राजमार्गों से निर्धारित दूरी के नियमों का पालन नहीं किया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी निरीक्षकों ने बिना मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किए ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी, जिसके परिणामस्वरूप 1 अप्रैल को दुकान खुलते ही ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

 

शहर के ब्रह्मपुरी स्थित माधवपुरम और टीपी नगर स्थित ऋषि नगर के बाद अब जानी खुर्द के ग्राम किठौली के लोगों ने भी शराब की दुकानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भीम आर्मी पार्टी के कार्यकर्ताओं के समर्थन के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और शराब की दुकान को दूसरी जगह नहीं शिफ्ट किया गया तो वे स्वयं ही दुकान को तोड़ देंगे।

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गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नई शराब की दुकानों का आवंटन 1 अप्रैल से लागू हुआ है। हालांकि, अभी तक कई दुकानों पर स्टॉक नहीं पहुंचा है और अनुज्ञप्ति धारकों ने केवल फ्लेक्स बोर्ड लगाए हैं। स्टॉक पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि आबकारी विभाग के निरीक्षक आवंटन से पहले मौके पर पहुंचकर दुकानों का निरीक्षण करते तो शायद यह समस्या उत्पन्न ही नहीं होती।

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ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर न केवल शराब की दुकान को हटाने की मांग की, बल्कि दुर्घटना में घायल हुई बच्ची के परिवार के लिए सरकार से आर्थिक मदद की भी गुहार लगाई। उनका कहना है कि चूंकि बच्ची का एक्सीडेंट शराब के ठेके की वजह से हुआ है, इसलिए सरकार को उसके इलाज और परिवार के भरण-पोषण के लिए उचित मुआवजा और सहायता प्रदान करनी चाहिए।
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