सबसे लंबे युद्ध का 2 दशक बाद अंत : तालिबान को भगाने से शुरू तालिबान की वापसी से खत्म; अफगानिस्तान में अमेरिका का सफर

तालिबान के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका को 31 अगस्त से तक पूरी तरह अफगानिस्तान को छोड़ देना था, लेकिन अमेरिका चौबीस घंटे पहले ही अफगानिस्तान से निकल गया।

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US Afghanistan Mission : अमेरिका ने आखिरकार अफगानिस्तान में आतंक के खिलाफ 20 साल लंबे अभियान का अंत कर दिया है। तालिबान के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका को 31 अगस्त से तक पूरी तरह अफगानिस्तान को छोड़ देना था, लेकिन अमेरिका चौबीस घंटे पहले ही अफगानिस्तान से निकल गया। 30 अगस्त की रात काबुल एयरपोर्ट से आखिरी अमेरिकी विमान C-17 ग्लोबमास्टर ने उड़ान भर ली, इस विमान में अफगानिस्तान छोड़ने वाले आखिरी अमेरिकी सैनिक मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू और अफगानिस्तान में अमेरिका के राजदूत रहे रॉस विल्सन भी सवार थे। Read Also : अफगानिस्तान छोड़ने वाले आखिरी अमेरिकी सैनिक बने मेजर जनरल क्रिस डोनह्यू, नाम हुआ इतिहास में दर्ज; जाने कौन हैं यें

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तालिबान को अगानिस्तान से भगाने से शुरू हुआ हाेकर तालिबान की वापसी पर खत्म हुआ यह युद्ध अमेरिका या उसकी सेना का किसी भी देश के खिलाफ सबसे लंबा और सबसे खर्चीला संघर्ष था।  दो दशक तक चले संघर्ष में अमेरिका को लाखों डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है। अमेरिका के अधिकारिक डाटा के मुताबिक़ साल 2001 से 2019 के बीच अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में कुल 822 अरब डॉलर ख़र्च किए। इसके अलावा उसके 2,400 सैनिकों की जान भी इसमें गई है। आइए जानते हैं कि अमेरिका ने क्यों शुरू किया था यह सैन्य ऑपरेशन और आखिर क्यों बिना अंजाम पर पहुंचाए अमेरिका ने इसे खत्म किया। Read Also : अरशद मदनी की तालिबानी सोच: कहा- बेटियों को अश्लीलता से बचाना है तो गैर मुस्लिम उन्हें लड़कों के साथ न पढ़ाएं

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 अफगानिस्तान में कब क्या हुआ

  • 11 सितंबर 2001 : आतंकी हमले से दहला अमेरिका
    • दुनिया को सबसे बड़ा आतंकी हमला झेलने के करीब एक महीने बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में आतंकवाद को पनाह देने वाले तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के वजूद को चुनौती देने वाले इस हमले में 3 हजार से ज्यादा लोगों की जानें गई थीं। 
  • 7 अक्टूबर 2001 : अफगानिस्तान में अमेरिका ने बोला धावा
    • अमेरिका ने इस हमले के मास्टरमाइंड औऱ अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन (Al Qaeda Osama Bin laden) को सौंपने के लिए तालिबान से कहा था, लेकिन तालिबान ने इससे इनकार कर दिया था। जवाब में अमेरिका ने 7 अक्टूबर 2001 को अफगानिस्तान में धावा बोल दिया। अमेरिकी अगुवाई में नाटो सेनाओं ने ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के तहत तालिबान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और अफगानिस्तान में हवाई हमला शुरू किया।
  • नवंबर-दिसंबर 2001 : 1300 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान पहुंचे
    • नवंबर-दिसंबर में 1300 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान पहुंचे। तालिबान के ज्यादातर बड़े नेता पाकिस्तान भाग गए, अफगानिस्तान (Afghanistan) में नाटो के सैन्य अभियान में ब्रिटेन, फ्रांस समेत कई देश हिस्सा थे। वर्ष 2001 से 2009 के बीच काबुल, कंधाार, हेरात समेत सभी बड़े शहरों को मिलाकर अमेरिकी सैनिकों की तादाद 67 हजार तक पहुंच गई।
  • 2009 : बराक ओबामा ने 1 लाख सैनिक तैनात किए 
    • अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा (US President Barack Obama ) ने 2009 में ऐलान किया कि अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों को खत्म करने के लिए सैनिकों की संख्या 1 लाख तक बढ़ाई जाएगी।
  • 2011- ओसामा बिन लादेन ढेर
    • अफगानिस्तान में सैन्य अभियान के 10 साल बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में खुफिया मिशन के तहत खोज निकाला। 2 मई 2011 को अमेरिकी नेवी सील कमांडो ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर(Operation Neptune Spear)  के तहत ऐबटाबाद में उस इमारत में घुसे और ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden killed) का खात्मा कर दिया। कमांडो उसकी लाश को भी साथ ले गए।
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अमेरिका के आखिरी विमान के उड़ान भरने पर उसकी तस्वीर लेता एक तालिबानी लड़ाका।
  • 2013 तालिबान के बड़े नेता ढेर
    • अमेरिका के ड्रोन हमले (US drone strikes.) में हकीमुल्ला मेहसूद  तालिबान के तीन बड़े नेता ढेर हुए। तालिबान ने आत्मघाती हमलों की चेतावनी दी। काबुल और कंधार में तालिबान ने कई बड़े आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया। सैकड़ों लोग मारे गए।
  • 2015 Trump ने घटाए अमेरिकी सैनिक 
    • बराक ओबामा के ऐलान के बाद अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की तादाद घटकर 10 हजार से भी कम रह गई। हालांकि 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump ) ने और सैनिक भेजे, जिससे यह तादाद फिर 14 हजार पार कर गई।
  • 2018 तालिबान से वार्ता का ऐलान
    • ट्रंप ने सितंबर 2018 में तालिबान नेताओं से बातचीत के लिए अफगान मूल के अमेरिकी राजनयिक जलमय खालिलजाद को जिम्मेदारी दी, बातचीत के बीच तालिबान ने अफगानिस्तान के कई सुदूरवर्ती इलाकों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।
  • 2019 Taliban से​ बातचीत टूटी
    • अमेरिकी प्रतिनिधियों में बातचीत के बीच तालिबान के हमले जारी रहे। काबुल में हुए हमले में कई अमेरिकी सैनिक मारे जाने के बाद ट्रंप ने वार्ता खत्म करने का ऐलान कर दिया। 
  • 2020- दोहा (Doha) में शांति समझौता
    • अमेरिका और तालिबान के बीच कतर की राजधानी दोहा में 29 फरवरी 2020 को एक शांति समझौता हुआ। इसके तहत अमेरिका 1 मई 2021 से अपने सैनिकों की वापसी पर राजी हुआ। तालिबान ने अफगानिस्तान की सरजमीं से किसी आतंकी संगठन को मदद न करने का भरोसा दिया।
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अमेरिका के जाने के बाद फायरिंग कर जश्न मनाते तालिबानी लड़ाके।
  • 14 अप्रैल -बाइडेन ने किया वापसी का ऐलान
    • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden ) ने 14 अप्रैल 2021 को घोषणा की कि अमेरिकी सैनिकों की 1 मई से अफगानिस्तान से वापसी शुरू हो जाएगी और 11 सितंबर तक पूरी होगी। अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने नागरिकों, एजेंटों और मददगार अफगानी लोगों को निकाला। करीब 1 लाख 20 हजार लोगों को 15 दिन में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
  • 15 अगस्त 2021 -तालिबान का कब्जा, अशरफ गनी Kabul से भागे
    • अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तालिबान ने मई में ही संघर्ष छेड़ दिया। ग्रामीण इलाकों के बाद कंधार, हेरात, जलालाबाद जैसे शहरों से भी अफगान सैनिक भाग खड़े हुए। तालिबान लड़ाके 15 अगस्त 2021 तक काबुल पहुंच गए और अफगान राष्ट्रपति कार्यालय पर धावा बोल दिया। राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani ) देश छोड़कर भागे।
  • 30 अगस्त 2021 : अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी
    • अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी हो गई है। पिछली रात को इससे पहले कि बारह बजते और तारीख बदलकर 31 अगस्त 2021 हो जाती, काबुल एयरपोर्ट से आखिरी अमेरिकी विमानों ने उड़ान भर ली और इसी के साथ अफगानिस्तान में बीस साल पहले शुरू हुआ अमेरिका का युद्ध भी समाप्त हो गया। तालिबान के साथ हुए समझौते के तहत अमेरिका को 31 अगस्त से तक पूरी तरह अफगानिस्तान को छोड़ देना था। लेकिन अमेरिका चौबीस घंटे पहले ही अफगानिस्तान से निकल गया। जैसे ही अमेरिका के चार सैन्य परिवहन विमानों सी-17 ने काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरी, तालिबान के लड़ाकों ने जश्न में फायरिंग शुरू कर दी।

तालिबान के कब्जे में काबुल एयरपोर्ट
अमेरिका के चार सैन्य परिवहन विमानों सी-17 ने काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरी वैसे ही तालिबानी लड़ाकों ने हवाई फायरिंग की। अब काबुल एयरपोर्ट पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। काबुल एयरपोर्ट पर हुई फायरिंग को लेकर तालिबान के प्रवक्ता अमानुल्ला वासिक ने ट्विटर पर बताया, ‘काबुल के लोगों डरो मत, ये गोलियां हवा में दागी जा रही हैं। मुजाहिदीन आजादी का जश्न मना रहे हैं। 

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अमेरिकी सेना के काबुल एयरपोर्ट छोड़ने के बाद

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