लखनऊ: बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लिए अब रोजाना गोली नहीं, 6 महीने तक एक इंजेक्शन से रहेगा नियंत्रित
केजीएमयू में 'स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए थेरेपी' शुरू, साल में सिर्फ दो बार लगेगा इंजेक्शन
Apr 2, 2025, 18:20 IST
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लखनऊ: अब बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए मरीजों को रोजाना गोलियां खाने की आवश्यकता नहीं होगी। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में एक नई और प्रभावी थेरेपी, 'स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए थेरेपी' की शुरुआत की गई है। इस थेरेपी के तहत, एक इंजेक्शन के माध्यम से छह महीने तक कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखा जा सकता है। यह उन मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है जिनका कोलेस्ट्रॉल रोजाना कई गोलियां लेने के बावजूद भी नियंत्रित नहीं हो पा रहा था।READ ALSO:-मेरठ: UP में अप्रैल से जून तक भीषण गर्मी का अलर्ट, हीट वेव का खतरा
उच्च कोलेस्ट्रॉल और नई थेरेपी:
शरीर में 200 mg/dL से अधिक कोलेस्ट्रॉल को उच्च माना जाता है और यह हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है। अभी तक, उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों के लिए रोजाना दवाएं खाना ही एकमात्र विकल्प था। लेकिन अब केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में 'स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए थेरेपी' शुरू हो गई है। इस थेरेपी में रोग से जुड़े जीन को शांत करने के लिए आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक पर काफी समय से परीक्षण चल रहा था और अब इसका इंजेक्शन विकसित कर लिया गया है।
साल में सिर्फ दो बार इंजेक्शन:
केजीएमयू में लारी कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. अक्षय प्रधान ने इस नई थेरेपी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोलेस्ट्रॉल एक वसायुक्त पदार्थ है जो शरीर की कोशिकाओं में पाया जाता है। यह शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा हृदय और अन्य गंभीर रोगों का कारण बन सकती है। हृदय रोगों से बचाव के लिए कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है। डॉ. प्रधान ने बताया कि 'स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए थेरेपी' के तहत विकसित इंजेक्शन को साल में सिर्फ दो बार ही लगवाना पड़ेगा। इस इंजेक्शन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर पूरी तरह से नियंत्रित रहेगा और मरीजों को अलग से दवाएं खाने की आवश्यकता नहीं होगी।
इन तीन तरह के मरीजों के लिए है विशेष रूप से उपयोगी:
डॉ. अक्षय प्रधान ने यह भी बताया कि फिलहाल यह इंजेक्शन मुख्य रूप से तीन प्रकार के मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाएगा:
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गोलियां खाने के बाद भी शरीर में दर्द बने रहने वाले मरीज: कुछ मरीजों को कोलेस्ट्रॉल की गोलियां खाने के बाद भी मांसपेशियों में दर्द या अन्य प्रकार की असहजता महसूस होती है। ऐसे मरीजों के लिए यह इंजेक्शन एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
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आनुवांशिक वजह से अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल वाले बच्चे: कुछ बच्चों में आनुवांशिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक होता है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है। ऐसे बच्चों के लिए यह इंजेक्शन प्रभावी हो सकता है।
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दो से तीन गोलियां खाने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल अनियंत्रित रहने वाले मरीज: ऐसे मरीज जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए दो या तीन अलग-अलग दवाएं ले रहे हैं, लेकिन फिर भी उनका कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य नहीं हो रहा है, वे भी इस इंजेक्शन से लाभान्वित हो सकते हैं।
केजीएमयू में इस नई थेरेपी की शुरुआत से उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित मरीजों को एक नया और सुविधाजनक उपचार विकल्प मिल गया है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
