मेरठ : 4 महीने की सैलरी और साथ ही 15 दिन की ट्रेनिंग और उसके बाद बॉर्डर ड्यूटी।...फर्जी कर्नल ने सेना में फर्जी भर्ती करा ली......

मेरठ आर्मी इंटेलिजेंस ने सेना में फर्जी नौकरी देने वाले गिरोह को पकड़ा है। इस गिरोह का सरगना कोई और नहीं बल्कि एक फौजी जवान निकला। आरोपी सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया है।
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ARMI
भारतीय सेना में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। जालसाज भोले-भाले युवकों को फंसाकर उनसे लाखों की ठगी कर लेते हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ का है, जहां एक जालसाज ने सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर 16 लाख रुपये ठग लिए। खास बात यह है कि यह जालसाज कोई और नहीं बल्कि खुद सेना का जवान निकला। आरोपी कांस्टेबल ने कर्नल बनकर फर्जी नौकरी हासिल की। हद तो तब हो गई जब कानपुर टेरिटोरियल में 15 दिन की ट्रेनिंग भी हो गई। इसके बाद पठानकोट में आर्मी मेस में खाना बनवाया और बॉर्डर पर ड्यूटी भी लगवाई थी। इतना ही नहीं उनके खाते में चार महीने से वेतन के रूप में 12 हजार रुपये जमा थे। Read Also:-उत्तर प्रदेश में भी दिल्ली के श्रद्धा जैसा कांड, खुद के पति ने ही साड़ी से अपनी पत्नी का गला घोंटा, फिर शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर फेंक दिया

 

जानकारी के मुताबिक आरोपी कांस्टेबल का नाम राहुल है। राहुल ने मेरठ के दो युवकों मनोज और उसके भाई को सेना में नौकरी दिलाने का वादा किया। राहुल ने मनोज से कहा कि वह सेना में कर्नल है। राहुल की बातों से प्रभावित होकर मनोज और उसके भाई ने उसे 16 लाख रुपये दिए। 10 लाख नकद के रूप में दिए, जबकि छह लाख रुपए खाते में जमा करा दिए। उसके बाद राहुल मनोज को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर कानपुर टेरीटोरियल भी ले गया था।

 

सेना की वर्दी बाजार से खरीदी
इधर, राहुल ने अपने परिचित के राजा से संपर्क किया और मनोज को 15 दिन की ट्रेनिंग दी। यहां 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद राहुल मनोज को लेकर पठानकोट चला गया। राहुल मनोज को अपने साथ टेरिटोरियल आर्मी के दफ्तर में रखने लगा। राहुल ने मनोज ने बाजार सेना की वर्दी और पहचान भी पत्र दिया। उन्हें अपने पठानकोट कार्यालय में फॉलोअर के रूप में रखा। मनोज वहां भी खाना बनाने लगा। इसके साथ ही कभी-कभी सीमा पर सेना के हथियारों के साथ ड्यूटी भी की जाती थी।

 

हर माह 12 हजार रुपए वेतन दिया
मनोज को ट्रेनिंग समेत चार माह की ड्यूटी कराई गई। इतना ही नहीं उनके खाते में हर महीने 12 हजार रुपये भी भेजे जाते थे। खास बात यह है कि यह सब चार साल तक होता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। सूचना मिलने के बाद अधिकारियों के कान खड़े हो गए। आनन फानन में पुलिस ने आरक्षक राहुल को गिरफ्तार कर लिया। राहुल के बताए उस स्थान पर आर्मी इंटेलिजेंस और दौराला थाना पुलिस ने छापा मारा, जहां से पिस्टल भी मिली। आर्मी इंटेलिजेंस ने कानपुर टेरिटोरियल से संपर्क किया तो पता चला कि राजा फरार है।

 

रक्षा मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लिया
पुलिस ने इस मामले में राजा के साथ राहुल, बिट्टू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है, क्योंकि यह मामला सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर है। वहीं, पुलिस टीम के साथ आर्मी इंटेलीजेंस आरोपी को पकड़ने में लगी हुई है। पुलिस का कहना है कि युवक को फर्जी तरीके से भर्ती कर सेना के कैंप में ड्यूटी लगा दी गई। यह सेना की सुरक्षा में सेंध है। साथ ही देश की सुरक्षा को भी खतरा है।
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