'यह बहुत खतरनाक है', जांच के दौरान मोबाइल और लैपटॉप जब्त होने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, दिशानिर्देश बनाने के दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त करने का अधिकार न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि इससे लोगों की निजता पर भी असर पड़ता है। केंद्र सरकार इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर दिशानिर्देश जारी करे। शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई दिसंबर तक के लिए टाल दी।  
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Supreme court
जांच एजेंसियों द्वारा जांच के दौरान मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को केंद्र सरकार को इस संबंध में दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों के इस तरीके को बेहद खतरनाक बताया। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान डिजिटल डिवाइस जब्त करने का अधिकार न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि इससे लोगों की निजता पर भी असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस संबंध में चार हफ्ते के भीतर दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया। READ ALSO:-दिल्ली वायु प्रदूषण: सरकार ने समय से पहले घोषित की शीतकालीन छुट्टियां (Winter School Break), दिल्ली में 9 से 18 नवंबर तक स्कूल बंद

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें से एक याचिका फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स ने दायर की है। इस याचिका में केंद्र सरकार से डिजिटल उपकरणों को जब्त करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं हैं कि जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब और क्यों जब्त करेंगी। 

 

ये मीडिया प्रोफेशनल्स, अपने-अपने सूत्र
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने बार-बार अपराध किया है या राष्ट्र विरोधी तत्व हैं जो महत्वपूर्ण डेटा चुरा सकते हैं। इसको लेकर सरकार कदम उठा रही है। इसके लिए कुछ समय की आवश्यकता है।  इस पर कोर्ट ने कहा कि ये मीडिया प्रोफेशनल हैं। उनके पास अपने स्वयं के स्रोत और अन्य जानकारी भी हैं। सब कुछ ले लोगे तो दिक्कत हो जायेगी। 

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इस देश को सिर्फ एजेंसियां नहीं चला सकतीं
शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके लिए कुछ दिशानिर्देश होने चाहिए। इस देश को सिर्फ एजेंसियां नहीं चला सकतीं। सरकार को एक दिशानिर्देश जारी करना चाहिए जो दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करे। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हम सभी कानूनी पहलुओं पर बात करेंगे। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई दिसंबर तक के लिए टाल दी है।
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