मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को श्रीकृष्ण मंदिर बनाने की मांग वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जरूरत नहीं...

सुप्रीम कोर्ट ने आज मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को श्रीकृष्ण जन्मस्थान के रूप में मान्यता देने की मांग वाली वकील महक माहेश्वरी की याचिका पर झटका दिया। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में याचिका की जरूरत नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा है कि इसे एक अलग मामले के तौर पर दर्ज किया जा सकता है। 
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MATHURA
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर हिंदुओं को सौंपने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कई मुकदमे अदालतों में लंबित हैं। इसलिए सुनवाई की जरूरत नहीं है। यह याचिका उन याचिकाओं से अलग दायर की गई थी जिन पर हाई कोर्ट पहले से ही सुनवाई कर रहा था। याचिका में मांग की गई थी कि जिस स्थान पर ईदगाह मस्जिद है, वह श्रीकृष्ण का जन्मस्थान है। कोर्ट को उस स्थान पर हिंदुओं के पूजा करने के अधिकार को सुनिश्चित करना चाहिए। READ ALSO:-हलाल सर्टिफिकेट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से मांगा जवाब, दिया दो हफ्ते का वक्त

 

इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर अदालत के समक्ष पहले से ही मामले लंबित हैं, जिनमें ये मुद्दे उठाए गए हैं। इसलिए इस पर अलग से सुनवाई की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता वकील ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच के सामने सुनवाई हुई। 

 

अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका खारिज करने के बाद वकील माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने विवादित स्थल को हिंदू भगवान कृष्ण के वास्तविक जन्मस्थान के रूप में मान्यता देने की मांग की थी और कृष्ण जन्मभूमि जन्मस्थान के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना के लिए जमीन हिंदुओं को सौंपने का आग्रह किया था।

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याचिका में यह भी दावा किया गया कि यह स्थल इस्लाम से पहले का है और विवादित भूमि के संबंध में अतीत में किए गए समझौतों की वैधता पर सवाल उठाया गया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस खन्ना ने कहा कि जनहित याचिका की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि इसी मुद्दे पर पहले से ही कई सिविल मुकदमे लंबित हैं। आपने इसे जनहित याचिका के रूप में दाखिल किया, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया है। इसे सामान्य केस की तरह दर्ज करें, हम देखेंगे।

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1968 के समझौते पर भी सवाल
याचिकाकर्ता ने 12 अक्टूबर 1968 को हुए समझौते पर भी सवाल उठाए थे। श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ और शाही ईदगाह के बीच जमीन बंटवारे का समझौता हुआ था। याचिका में कहा गया है कि यह समझौता ही गलत था। श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ को यह समझौता करने का अधिकार नहीं था।
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