Connect with us

Hi, what are you looking for?

शामली

आयुर्वेदिक स्टोर पर छापा : मिलें जानवरों के अंग, बनाई जा रही थी दवाइयां





जनपद शामली में वन विभाग की टीम ने छापा मारते हुए एक आयुर्वेदिक चिकित्सा की दुकान से वन्य जीवों के अंग बरामद किए है। काफी समय से वन विभाग को शिकायत मिल रही थी की यहां वन्य जीवों के अंगों से आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई जा रही थी।

छापेमारी में बरामद हुईं हुए जानवरों के अंग

जिसके बाद आज वैन विभाग किबतें को छापेमारी में हिरण के सींग, टाइगर के नाखून व बड़ी बड़ी छिपकली का लिंग एवम वन्य जीवों के अन्य अंग आदि सामान बरामद किया है। पुलिस ने दुकान संचालक को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। छापेमारी में मिले अंगों की कीमत लगभग 5 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने वन विभाग के रेंजर की तहरीर पर वन्य जीव अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत करते हुए आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।





वन्यजीवों के अंगों की तस्करी

बता दें कि मामला जनपद शामली की सदर कोतवाली क्षेत्र का है, जहाँ पर क्षेत्रीय वन अधिकारी धर्मवर्त शर्मा को सूचना मिली थी कि गांधी चौक स्थित एक आयुर्वेदिक दुकान पर वन्य जीवों के अंग बेचे जा रहे हैं। वही यह अंग पुरुषार्थ शक्ति को बढ़ाने के लिए वन्यजीवों के अंगों की तस्करी की जा रही है। वहीं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय वन अधिकारी ने सदर कोतवाली पुलिस के साथ गांधी चौक स्थित दुकान पर छापेमारी की है। छापेमारी में पुलिस ने मौके से हिरण के सींग, टाइगर के नाखून, बड़ी छिपकली का लिंग आदि सामान बरामद किया है।





वन अधिकारी को छापेमारी के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सा की दुकान से वन्य जीवों की हड्डियां भी बरामद हुई है जिन्हें फॉरेंसिक जाँच के लिए भेज जा रहा ताकि यह पता चल सके कि आखिर हड्डी किस वन्य जीव की है। बताया जा रहा है कि वन अधिकारी को काफी दिनों से वन्य जीवों के अंगों की तड़कारी की सूचना मिल रही थी जिस पर आज छापेमारी की गई और यह सब सामान बरामद हुआ। पुलिस ने दुकान संचालक डॉ निशांत गुप्ता को मौके से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए तस्कर पर वन्यजीव अधिनियम के तहत सदर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराते हुए आगे की वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।





Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
Advertisement

और खबरें पढ़ें

Advertisement
DMCA.com Protection Status