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MEERUT CORONAVIRUS (कोरोना वायरस मेरठ)

MEERUT : नहीं थम रही लापरवाही, कोविड वार्ड से वीडियो जारी कर मरीज बोला, बराबर में डेथ बॉडी पड़ी है, हमें इलाज नहीं मिल रहा

MEERUT मे पिछले 10 दिन में 9 मौत कोरोना से हो चुकी हैं, और ज्यादातर मौतों में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही सामने आई हैं। MEERUT मेडिकल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीज लगातार वीडियो और ऑडियो जारी कर अपनी पीड़ा बता रहे हैं, लेकिन न प्रदेश के मुखिया इसे कोई तवज्जो दे रहे हैं और न ही MEERUT प्रशासन। लोग इलाज के अभाव में मर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री आदित्यनाथ महज घोषणाओं और दावों के जमीनी तौर पर कोई सुधार नहीं कर रहे। रविवार को MEERUT मेडिकल काॅलेज में एक मरीज की ऑडियो जारी कर अपनी परेशानी बताई थी, वहीं एक वीडियो वारयल हुआ था जिसमें एक व्यक्ति ने इलाज न मिलने पर तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया था।

अब रविवार को एक और मरीज ने वीडियो जारी किया है वह मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती है। मरीज का कहना है कि उसने 6 मई को तबीयत खराब हाेने पर वह मेडिकल कॉलेज में आया था, लेकिन मुझे दवाई देकर लौटा दिया गया। परिजनों ने एंबुलेंस के लिए कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं गई। फिर दिक्कत हुई तो प्राइवेट लैब में टेस्ट करवाया, लेकिन मुझे फिर भी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। शुक्रवार को दिक्कत होने पर मुझे स्वास्थ्य विभाग की टीम लेने पहुंची। पहले तो टीम मुझे खरखौदा ले गई, लेकिन वहां से फिर मेडिकल ले आए। यहां मुझे धूप में छोड़ दिया गया। मैं खुद कैसे-कैसे करके ऊपर फ्लोर पर आया, लेकिन अस्पताल में किसी ने मुझे नहीं संभाला। अब मैं वार्ड में हूं, लेकिन कोई नहीं पूछ रहा। गंदगी है, सभी परेशान हैं। पास में पदम सिंह की डेथ हो गई है, लेकिन बॉडी पर चादर भी नहीं डाली थी। बॉडी मरीजों के बीच में ही पड़ी है, बहुत कहने पर चादर डाली। बाकी मरीज भी परेशान हैं। वार्ड में भर्ती अन्य मरीज भी अपनी परेशानी बता रहे हैं।

MEERUT में मृत्युदर प्रदेश में सबसे ज्यादा फिर भी मुख्यमंत्री गंभीर नहीं

मेरठ में अभी तक 244 लोग संक्रमित हैं, जिनमें से 14 दम तोड़ चुके हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा संक्रमित (700 से ज्यादा) आगरा में हैं, लेकिन वहां अभी 21 मौत हुई हैं। ऐसे में मेरठ में कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर सबसे ज्यादा 5.73 प्रतिशत है, लेकिन इसके बावजूद लगातार लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। व्यवस्था सुधारने की दिशा में न तो प्रदेश के मुख्यमंत्री कदम उठा रहे हैं और न ही केंद्र सरकार इस लापरवाही पर कोई ध्यान दे रही है।

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