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मेरठ

यूपी में बेड की कमी नहीं! मेडिकल कॉलेज में कोविड मरीजों का इलाज करने वाली नर्स के पति को ही न बेड मिला न ऑक्सीजन; तड़प-तड़प कर तोड़ दिया दम

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार यह दावा करते नहीं थक रहे हैं कि प्रदेश में न बेड की कमी है न ऑक्सीजन की, लेकिन रोजाना ऐसी तस्वीरें सामने आती है जिससे आम जनता की आंखों में तो आंसू आ जाते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अपने दावे से पीछे नहीं हटते, उन्हें अपने झूठ पर जरा सी शर्म नहीं आती।

एक दिन पहले जहां उत्तरप्रदेश के बहराइच में 2 बच्चियां ऑक्सीजन ना मिलने पर अपनी माँ को मुहं से ऑक्सीजन देने का प्रयास करती रहीं थी, लेकिन उनकी जान नहीं बचा पाईं थीं, वहीं अब एक फ्रंट लाइन वरियर जो खुद कोविड वार्ड में ड्यूटी कर कोरोना संक्रमितों की सेवा कर चुकी है अपने पति को बेड या ऑक्सीजन दिलाने के लिए अफसरों से मिन्नते करती रही, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। आखिर में दूसरों की जान बचाने वाली इस स्टाफ नर्स के पति ने तड़प-तड़प के दम तोड़ दिया।

अमित सिंह

यह शर्मनाक मामला उत्तरप्रदेश के मेरठ जिले का है। यहां रहने वाली अमृता पीटर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात हैं। अमृता फिलहाल आईटी मेडिसन वार्ड में तैनात हैं और कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड में ड्यूटी भी कर चुकी हैं। अमृता पीटर के पति अमित सिंह की बीते दिनों तबियत बिगड़ गई थी। 29 अप्रैल को उनका कोविड जांच के लिए सैम्पल दिया गया गया, जिसकी रिपोर्ट में रिपीट सैम्पल बता दिया गया। इसके बाद 1 मई को दोबारा एंटीजन टेस्ट के लिए सैम्पल दिया गया, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई।

उधर अमित की हालत लगातार बिगड़ रही थी। अमृता ने मेडिकल कॉलेज समेत अन्य अस्पतालों में अमित को एडमिट कराने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने ऑक्सीजन न होने की बात कही तो किसी ने बेड न होने की बात करकर अमित को भर्ती करने से मना दिया। अमृता ने मेडिकल कॉलेज के ही मेडिसन अनीता प्रकाश और मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सुधीर राठी समेत अन्य अफसरों और चिकित्सकों से भी गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। इसके बाद अमृता ने अमित को मेडिकल कॉलेज के मेडिसन वार्ड में जैसे तैसे भर्ती किया, लेकिन यहां उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पाई।

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अमृता की बहन अंकिता ने बताया कि उन्होंने जैसे तैसे खाली ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर भी ली थी, लेकिन उसे भरवा नहीं पाए। आखिर में ऑक्सीजन न मिलने के कारण अमित ने तड़प-तड़प के दम तोड़ दिया। आरोप है कि उन्होंने सिलेंडर भरवाने के लिए अनिता प्रकाश से कॉल कर गुहार लगाई, लेकिन अनीता ने हम कुछ नहीं कर सकते बात कहकर हाथ खड़े कर लिए। अंकिता भी मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं। अंकिता का कहना है कि उन्होंने और उनकी बहन अमृता ने अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड वार्ड में मरीजों की सेवा की, लेकिन जब हमारे अपने परिजन को मदद की जरूरत थी तो जिम्मेदारों ने हाथ खड़े कर दिए।

अंकिता और अमृता का आरोप है कि अगर अनीता प्रकाश और सुनील राठी उनकी मदद कर देते तो आज अमित की जान बच सकती थी। अमित को वेंटिलेटर की जरूरत थी, हमने उनके लिए ऑक्सीजन के खाली सिलेंडर की व्यवस्था भी कर ली थी, लेकिन मेडिकल कॉलेज द्वारा वेंटिलेटर देना तो दूर ऑक्सीजन सिलेंडर को रिफिल तक नहीं कराया जा सका। अंकिता का कहना है कि इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जनप्रतिनिधि लगातार दावा कर रहे हैं कि अस्पतालों में बेड की कमी नहीं है, लेकिन एक फ्रंट लाइन वरियर के पति ने ही बेड और ऑक्सीजन ना मिलने के कारण दम तोड़ दिया। अंकिता ने बताया कि अमित और अमृता के 2 छोटी-छोटी बच्चियां हैं, लेकिन सरकार के झूठे दावे और असफरों की लापरवाही के कारण पिता का साया उनके सिर से उठ गया।

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