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Mother’s Day : तेरी परछायी, तेरी छाया हूँ …

मां वो होती है जो बिना किसी लालच अपने बच्चों को प्यार करती है। बिना किसी आस के बच्चों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देती है। मां के प्‍यार, बलिदान और तपस्‍या के बदले हम चाहे जो कुछ भी कर लें वह कम ही होगा। यही वजह है कि हर साल भारत समेत ज्‍यादातर देशों में मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो मां के लिए कोई एक दिन नहीं हो सकता है, लेकिन इस दिन को सेलिब्रेट कर के लोग अपनी मां को खास महसूस करवा सकते हैं। इस साल मदर्स डे 10 मई यानि आज है। ऐसे में खबरीलाल के कुछ पाठकों ने मां के साथ जुड़े कुछ खास अहसास को हमसे और अन्य पाठकों से साझा किया है।

हर राह पर मुझको संभलना सिखाया : हेमलता जैन, साकेत नगर भोपाल

भोपाल साकेत से हेमलता जैन ‘रचना’
अपनी माता के साथ

हर राह पर मुझको संभलना सिखाया,
कठिन डगर पर चलना सिखाया,
कहीं टूट कर बिखर ना जाऊँ मैं
कुछ मुश्किल हालातों में ..
हर परिस्थिति से उबरना सिखाया ,
अपना, परिवार का, दोस्तों का तो ख्याल रखते हैं सभी,
जो किसी और के भी अपने हैं,
उनके लिए भी सोचना सिखाया,
बहुत कुछ पाया है हमने, ऊपर वाले की कृपा से,
जरूरतमंदों को भी देना सिखाया,
आँखों में शर्म ..दिल में दया… लबों पर दुआ
धर्म का सिर्फ यही मर्म सिखाया …
बेटियां तो होती हैं घर की राजकुमारी,
बचपन से यही पाठ तुमने सिखाया।
खुश रहना और सभी को रखना भी सदा
वो जादू भी तो माँ तुमने ही बताया।
जो कहीं नहीं लिखा, दुनिया की किसी भी किताब में…
वो सब कुछ मेरी माँ ने, हरदम सिखाया …
i- love- you -Maaaaa

तू मेरी शक्ति,तू मेरी पहचान है माँ : प्रतिभा टोंग्या, साकेत नगर भोपाल

प्रतिभा टोंग्या, साकेत नगर भोपाल

अच्छी हूँ ,बुरी हूँ, जैसी भी हूँ
तेरी परछायी, तेरी छाया हूँ ।
इस computer युग में मोबाइल
भले मुझसे पूछ कर चलाती हो ,
खाना पर मैं तुझसे ही पूछ कर बनाती हूँ।
पचास की होने पर
बेटे से पूछा करती हूँ कि कैसी दिखती हूँ?
हँसकर कहता है नानी की तरह दिखती हूँ .
50 की होकर अब मैं भी
आप ही की तरह हूँ।
बेटे की तबीयत खराब
होने पर दवाई मैं देती हूँ पर,
मेरी तबीयत खराब होने पर
दवाई तो आप ही बतलाती हो।
सुबह जल्दी उठना तुझसे सीखा।
हर त्यौहार पर क्या बनाना होता
यह भी तो आप ही ने सिखलाया।
तुमसे जुड़े मेरे हर काम हैं माँ
तू मेरी शक्ति,तू मेरी पहचान है माँ।

मेरी मां मेरी दुनिया है, हर दिन मेरा मदर्स डे है

अपनी मां सरिता जायसवाल के साथ शुभम

मेरठ के रहने वाले एडवोकेट शुभम जायसवाल बताते हैं कि जब वे महज साढ़े तीन साल के थे उनके पिता का देहांत हो गया था। जिसके बाद उनकी माता सरिता जायसवाल ने बेहद कठिनाइयों के साथ उनकी और उनके छोटे भाई की परवरिश की। शुभम कहते हैं मेरी मां ने जीवन के उतार-चढ़ाव को पार करते हुए हमें आज काबिल इंसान बनाया, अच्छे संस्कार दिए। यह मेरी मां के प्रेम और उनके विश्वास की बदौलत आज मैं वकील और मेरा छोटा भाई विशाल जायसवाल सैमसंग कंपनी में इंजीनियर है। शुभम ने कहा कि हमारे लिए हमारी मां हमारी दुनिया है। सिर्फ आज ही नहीं साल के 365 दिन मदर्स डे हैं।

मां ने बढ़ाया हौसला, इसीलिए कोरोना से जंग में डटी हूं

अपनी मां के साथ अंकिता

मेडिकल कॉलेज में तैनात मेडिकल ऑफिसर इस कोरोना के इस संकटकाल में योद्धा की तरह काम कर रही हैं। अंकिता मूल रूप से बरेली की रहने वाली हैं, लेकिन उनकी पोस्टिंग मेरठ मेडिकल में हैं। मदर्स डे पर वे अपनी मां और घर से दूर हैं। अंकिता ने बताया कि कोरोना का खतरा रोज करीब से देखते हैं। डर लगता था, लेकिन मेरी मां ने मेरा हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अगर तुम दूसरों के लिए अच्छा करोगे तो समझ लो तुमने स्वर्ग का आधा रास्ता पार लिया। मां ने हमेशा कहा कि लोगों की मदद करो, सुकुन मिलेगा। बस आज मां के आशीर्वाद के साथ मैदान में डटी हुई हूं।


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