भारत ने किया ताकत और सुरक्षा क्षमता का प्रदर्शन, NH 925 पर वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने भरी हुंकार

भारतीय वायु सेना (IAF) के विमानों के लिए नेशनल हाईवे 925 (NH 925) पर सट्टा-गंधव खंड पर बनी एक इमरजेंसी लैंडिंग पट्टी (Emergency Landing Air Strip) का उद्घाटन गडकरी ने गुरुवार को किया गया।

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भारतीय वायु सेना (IAF) के विमानों के लिए नेशनल हाईवे 925 (NH 925) पर सट्टा-गंधव खंड पर बनी एक इमरजेंसी लैंडिंग पट्टी (Emergency Landing Air Strip) का उद्घाटन गडकरी ने गुरुवार को किया गया। इस दौरान भारत ने अपनी ताकत और सुरक्षा की क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इस 3 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी फील्ड लैंडिंग स्ट्रिप पर भारतीय वायु सेना (IAF) के C-130 J सुपर हरक्यूलिस विमान ने लैडिंग (C-130 J Super Hercules Aircraft Landing) की। इसके बाद फाइटर जेट्स सुखोई-30 (Fighter Jets Sukhoi-30) और जगुआर (Jaguar) ने भी इस इमरजेंसी स्ट्रिप पर टच एंड गो लैंडिंग की। देश में यह पहली बार है जब किसी नेशनल हाईवे का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग के लिए किया जा रहा है। 

 

19 माह में बनाकर तैयार हुआ हाईवे

सुपर हरक्युलिस में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सवार थे। यह इमरजेंसी लैंडिंग पट्टी पाकिस्तान बॉर्डर से 40 किलोमीटर दूर राजस्थान के बाड़मेर के हाईवे पर बनी है, वहीं । 3 किलोमीटर लंबा यह हाईवे Covid महामारी के बीच भी, महज 19 माह में बनाकर तैयार कर दिया गया। इस हवाई पट्‌टी को बनाने में 33 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। Read Also : सशस्त्र बलों में खत्म हुआ भेदभाव: सरकार ने SC से कहा- लड़कियों के लिए खुलेंगे नेशनल डिफेंस एकेडमी के दरवाजे

 

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ऐसे 12 हाईवे और तैयार किए जाएंगे

रक्षा और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय के सहयोग से देश में इस तरह के करीब 12 हाईवे तैयार किए जा रहे हैं। इमरजेंसी के हालात और रेस्क्यू या राहत पहुंचाने के मकसद से नेशनल हाईवे को लैंडिंग एयरस्ट्रीप में बदलने की तैयारी चल रही है। भारत से पहले जर्मनी, स्वीडन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, स्विटज़रलैंड और फ़िनलैंड आदि अन्य कई देशों में ऐसा हो रहा है। वहां हाईवे और एक्सप्रेसवे पर विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग होती हैं। Read ALso : Indian Air Force होगी और मजबूत, 56 C-295 MW विमान खरीदने को मंजूरी; TATA कंपनी बनाएगी

 

भारत में यह इस तरह की पहली एयर स्ट्रिप

भारत में यह पहली इमरजेंसी हवाई पट्टी है, जो बनकर तैयार हो चुकी है। जबकि, आंध्र प्रदेश में ऐसी दो, जबकि पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर एक-एक और हवाई पट्टी बनाई जा रही है। उत्तर प्रदेश में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हवाई पट्टी ऑपरेशनल है। जिस पर 2017 में वायुसेना ने ट्रायल किया था। भारत में ऐसे राजमार्ग पर करीब 12 जगह हवाई पट्टी बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें कई जगह काम चल रहा है और कुछ जगह शुरू होना है।

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इमरजेंसी हवाई पट्‌टी पर प्लेन की पार्किंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्लिंथ भी

बाड़मेर-जालोर जिले की सीमा अगड़ावा में बनी इमरजेंसी हवाई पट्टी वायुसेना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बनाई गई है। 32.95 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस हवाई पट्टी की लंबाई 3 किमी. और चौड़ाई 33 मीटर है। हवाई पट्टी के दोनों सिरों पर 40 गुणा 180 मीटर आकार की दो पार्किंग भी बनाई गई हैं, ताकि लैंडिंग के बाद विमानों को पार्क किया जा सके। इसके अलावा 25 गुणा 65 मीटर आकार की एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्लिंथ का डबल मंजिला एटीसी केबिन के साथ निर्माण किया गया है, इमरजेंसी हवाई पट्टी के पास 3.5 किमी. लंबी और 7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई गई है।

 

आज का यह दिन हम सबके लिए एक खास दिन

उद्घाटन के दौरान रक्षामंत्री ने कहा, “आज हमारा देश अपनी आजादी का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहा है। 1971 की विजय का ‘स्वर्णिम वर्ष’ मना रहा है। साथ ही यह स्थान, उत्तरलाई, जहाँ हम सभी उपस्थित हुए हैं, यह स्वयं 1971 की विजय का साक्षी रहा है। ऐसे में इस इमरजेंसी लैंडिग फील्ड (Emergency landing field) का निर्माण, मन में उत्साह भी पैदा करता है, और सुरक्षा के प्रति एक विश्वास भी। इसलिए आज का यह दिन हम सबके लिए एक खास दिन है। 

 

एयर स्ट्रिप को सुरक्षा के लिहाज से बनाया है
 "आपने सड़क पर ट्रैक्टर, बैलगाड़ी चलते हुए देखे होंगे और अब आप सड़क पर विमान उतरते हुए देख रहे हैं। इंटरनेशनल बॉर्डर से कुछ ही दूर ऐसी स्ट्रिप का तैयार होना ये साबित करता है कि हम अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं और सक्षम हैं। हम एक भारत और सशक्त भारत की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। यह इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड और तीन हेलीपैड न केवल युद्ध के समय में उपयोगी होंगे बल्कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के दौरान बचाव और राहत कार्य करने के लिए उपयोगी होंगे" राजनाथ सिंह 

 

रक्षा मंत्रालय और वायु सेना के समर्थन के सहयोग से हुआ सफल  0प्रक्षेपण

वहीं केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जब भी कोई आउट-ऑफ-द-बॉक्स विचार प्रस्तावित किया जाता है, तो आशंकाएं उभर आती हैं। रक्षा मंत्रालय और वायु सेना के समर्थन के लिए खुशी है जिसके कारण 3 किमी लंबी सड़क-सह-हवाई पट्टी का सफल प्रक्षेपण हुआ। 

 

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ऐसे ही नहीं लिया गया यह फैसला
सरकार की ओर से यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया है। ऐसा देखा गया है कि अक्सर दुश्मन देश के महत्वपूर्ण एयरबेस को टारगेट करते हैं। निशाना बनाकर उन्हें तबाह करने की कोशिश रहती है ताकि फाइटर जेट लैंड और टेकऑफ न कर पाए। ऐसा करीब 50 साल पहले भी देखा गया था जब 8 दिसंबर 1971 पाकिस्तान ने भुज एयरबेस पर बम दागे थे। इस हमले में एयरबेस का रनवे पूरी तरह तबाह हो गया था। भविष्य में ऐसे किसी हालात से निपटने के लिए ऐसे एयरस्ट्रिप को तैयार किया जा रहा है। अब वायुसेना को अपने ऑपरेशन्स के लिए और अधिक विकल्प और सीमा से सटे इलाकों में तत्काल एक्शन के लिए आसानी होगी। 

 


 

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