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RT-PCR रिपोर्ट आए नेगेटिव तो भी जरूर करवाएं CT स्कैन, इस जांच से पता चल जाएगा कोरोना फेफड़ों को कितना डेमेज कर चुका है

भारत में कोरोना लगातार खतरनाक होता जा रहा है। बीते 10 दिन से देश में रोजाना 3 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं, जबकि रोज 3 हजार से ज्यादा लोग दम तोड़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 3,68,147 नए मामले सामने आए, जबकि 3,00,732 लोग हुए स्वास्थ्य हुए। वहीं 3,417 लोगों की मौत भी हुई।

देश में लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक टेस्ट रिपोर्ट गलत आने, सैम्पल देने के कई दिन बाद तक रिपोर्ट ना आने और समय पर इलाज न मिलने के कारण ही ज़्यादातर लोग कोरोना से जान गंवा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 1,99,25,604 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 16,29,3003 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। यानी कोरोना को जानलेवा होने से पहले ही पकड़ना होगा और इलाज शुरू करना होगा।

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डॉ. शिप्रा का कहना है कि RT-PCR रिपोर्ट देर से या फिर गलत होने के कारण ही ज्यादातर मरीजों की हालत बिगड़ रही है। ऐसे में नुकसान ये हो रहा है कि खुद को निगेटिव मानते हुए मरीज न तो आइसोलेट हो रहे हैं और न ही सही इलाज ले पा रहे हैं। जबकि कोरोना का नया म्यूटेंट 2 से 3 दिन में ही फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। इसके चलते मरीज का तेजी से संक्रमण बढ़ता चला जाता है। पॉजिटिव होने के बाद भी जांच में निगेटिव आने वाले ये मरीज नई चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में रिपोर्ट नेगेटिव आने या फिर रिपोर्ट आने में ज्यादा समय लगने पर व्यक्ति को अपनी छाती (Chest) का हाई रेजोल्यूशन कॉम्प्यूटेड टोमोग्राफी (HRCT) टेस्ट सीटी स्कैन जरूर करा लेना चाहिए। सीटी स्कैन से इस बात की पुष्टि हो जाती है कि कोरोना वायरस ने व्यक्ति के फेफड़ों को कितना प्रभावित कर दिया है।

नए मरीजों में एंटीजन और RTPCR के संक्रमण के बाद भी निगेटिव आने की दो वजहें हो सकती हैं। एक कारण तो ये हो सकता है कि म्यूटेंट वायरस, प्रवेश के बाद नाक या मुंह में ज्यादा देर न ठहरते हुए सीधे लंग्स तक पहुंच जाते हों। इसकी वजह से जब नाक या मुंह से सैंपल लेते हैं तो वहां गैरमौजूद मिलते हैं, वहीं सीटी स्कैन में ये पकड़ाई में आ जाते हैं। जांच में न आने की एक और वजह ये भी हो सकती है कि नाक या मुंह से जो सैंपल लिया जा रहा हो, वो सही जगह से न लिया जा रहा हो।

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यही कारण है कि संक्रमित लोगों के ये दोनों टेस्ट निगेटिव आने के बाद भी उनमें कोरोना के लक्षण दिखें, तो डॉक्टर सीटी स्कैन करते हैं। इससे न केवल ये पता चल जाता है कि मरीज कोरोना संक्रमित है, बल्कि संक्रमण का स्तर पर पता लगता है। यानी मरीज हल्के लक्षण वाला है या फिर संक्रमण ने फेफड़ो पर कितना असर डाल दिया है।

कैसे रीड करें HRCT रिपोर्ट– आमतौर पर HRCT टेस्ट की रीडिंग CORAD स्कोर और CT स्कोर के आधार पर की जाती है, जो कि RT-PCR में डिटेक्ट की गई CT वेल्यू से एकदम अलग होती है। CT स्कैन में CORAD के आधार पर शरीर में वायरल इंफेक्शन के स्तर को निर्धारित किया जाता है। ज्यादा स्कोर फेफड़ों पर बड़े खतरे और कोविड-19 की गंभीरता को दर्शाता है।

  • CORAD की स्कोरिंग 1-6 अंकों के बीच की जाती है, जिसमें 1 का मतलब है- संदिग्ध व्यक्ति कोविड नेगेटिव है यानी उसके फेफड़ों का फंक्शन नॉर्मल है और उसे कोई ख़तरा नहीं है।
  • 2-4 के बीच स्कोर वायरल इंफेक्शन की संभावना को दर्शाता है। स्कोर में 5 का मतलब कोविड-19 के हल्के लक्षण से है। अगर रिपोर्ट में स्कोर 6 आ रहा है तो समझ लीजिए कोविड-19 से मरीज को खतरा बहुत ज्यादा है। आजकल संक्रमित होने के 2 से 3 दिन में ही मरीज का स्कोर 15 से 22 तक पहुंच रहा है।
  • RT-PCR की पॉजिटिव रिपोर्ट और सांस में तकलीफ के आधार पर भी मरीज को CORAD-6 स्कोर दिया जाता है।

CORADS के अलावा, HRCT स्कैन में कभी-कभी CT सीवियरिटी स्कोर भी मेंशन किया जाता है, जो कि हमें फेफड़ों की वास्तविक हालत के बारे में बताता है। हर लैब्स में इसे अलग-अलग तरह से रीड किया जाता है। अधिकांश लैब्स में इसे 1-40 या 1-25 के बीच अंकित किया जाता है। स्केल पर ज्यादा स्कोर फेफड़ों पर बड़े खतरे और कोविड-19 की गंभीरता को दर्शाता है।

यह है देश के हालात : आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 1,99,25,604 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 16,29,3003 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। मौत का आंकड़ा भी 2,18,959 पार कर चुका है। फिलहाल देश में 34,13,642 केस सक्रिय हैं।

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