दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण में गंदगी के ढेर पर बैठे मेरठ को 27वां स्थान, फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी भी बना

मेरठ को देश का सबसे तेजी के साथ बढ़ते हुए शहर के रूप में चुना गया है। 
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Meerut

गंदगी के ढेर पर बैठे मेरठ शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में देश का 27वां सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है। वहीं मेरठ कैंट को देश की दूसरी सबसे स्वच्छ छावनी चुना गया है। इसके अलावा देश का सबसे तेजी से आगे बढ़ता शहर भी मेरठ को चुना गया है। यह पहली बार है जब मेरठ को कोई राष्ट्रीय स्तर का सम्मान प्राप्त हुआ है। 


दरअसल शनिवार दोपहर को स्वच्छता सर्वेक्षण का परिणाम घोषित किया गया। पिछले साल 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों की सूची में मेरठ को 41वी रैंक मिली थी, यानी मेरठ को देश के सबसे गंदे शहरों की सूची में रखा गया था। हालांकि इसके बाद भी मेरठ शहर के हालात नहीं सुधरे थे। अभी भी जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। खुले नाले जहां लोगों की जान ले रहे हैं वहीं गंदगी के कारण बीमारियों का भी डर बना हुआ हैं। 

शहर की गंदगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर से रोजाना निकलने वाले 900 मीट्रिक टन कूड़े में से 650 टन कूड़ा ही उठ पाता है। 250 टन कूड़ा रोज शहर में पड़ा रहता है। हालात खराब होने पर इस बार भी शहर को कोई सम्मान मिलने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन शनिवार दोपहर आए स्वच्छता सर्वेक्षण ने सबको चौंका दिया और मेरठ देश का 27वां सबसे साफ शहर बन गया। मेरठ को स्वच्छ सर्वेक्षण में 3598.23 अंक मिले हैं।

राष्ट्रपति ने पुरस्कारों की घोषणा की

10 से 40 लाख की जनसंख्या वाले शहरों में नवी मुंबई को इंडियाज क्लीनेस्ट बिग सिटी, गाजियाबाद को बेस्ट बिग सिटी इन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज का राष्ट्रीय अवार्ड मिला है। मेरठ को भारत की फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी का दर्जा भी दिया गया है।


लगातार 5वीं बार सबसे साफ शहर बना इंदौर

मध्य प्रदेश के इंदौर को लगातार 5वीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। सूरत को दूसरा स्थान मिला है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा को देश के तीसरे सबसे स्वच्छ शहर बनने पर सम्मानित किया। वहीं, केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे स्वच्छ गंगा शहर की श्रेणी में यूपी के वाराणसी को पहला स्थान मिला है।

महापौर व नगर आयुक्त ने लिया सम्मान

राष्ट्रपति कोविन्द द्वारा 342 शहरों को सम्मानित किया गया, जिन्हें 'स्वच्छ सर्वेक्षण 2021' में गारबेज फ्री सिटी और सफाई मित्र चैलेंज की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में इन पुरस्कारों की घोषणा की गई। मेरठ नगर निगम की तरफ से मेयर सुनीता वर्मा और नगरायुक्त मनीष बंसल व कैंट बोर्ड के सीईओ नवेंद्र नाथ दिल्ली राष्ट्रपति भवन में सम्मान समारोह में पुरस्कार लेने पहुंचे हैं। 


2000 डेरियां, 50 मीट्रिक टन गोबर का कोई मैनेजमेंट नहीं

मेरठ शहर में लगभग 2000 डेयरियां हैं और इनसे रोजाना 50 मीट्रिक टन गोबर निकलता है, जिसमें से ज्यादातर नाली में बह जाता है। इसके प्रबंधन का कोई हल नगर निगम नहीं कर सका है। शहर में 56 ढलाव घर हैं। नगर निगम सीमा में 146 अस्थायी खुले कूड़ा घर हैं। जहां गोबर फेंका जाता है।


NGT की फटकार के बाद बना कूड़ा निस्तारण प्लांट

मेरठ शहर में कूड़े के निस्तारण की भी समस्या है, NGT के हस्तक्षेप के बाद शहर में मुश्किल से कूड़ा निस्तारण प्लांट शुरू हुआ। इसकी क्षमता 15 टन कूड़ा प्रति घंटे है, लेकिन यहां केवल पुराना कूड़ा निस्तारित होता है। इसी तरह 2021 में लोहिया नगर में 30 टन प्रति घंटे की क्षमता वाला प्लांट चालू हुआ है, यहां भी पुराना कूड़ा ही निस्तारित होता है।, ताजे कूड़े का निस्तारण आज भी शहर में नहीं है।

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